Friday, April 13, 2018

शहीद भगत सिंह



शहीद भगत सिंह

भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर, 1907 को लायलपुर ज़िले के बंगा में (अब पाकिस्तान में) हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनका पैतृक गांव खट्कड़ कलाँ  है जो पंजाब, भारत में है। उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था। भगत सिंह का परिवार एक आर्य-समाजी सिख परिवार था।  भगत सिंह करतार सिंह सराभा और लाला लाजपत राय से अत्याधिक प्रभावित रहे I







रोचक तथ्य:-
• बचपन में जब भगत सिंह अपने पिता के साथ खेत में जाते थे तो पूछते थे कि हम जमीन में बंदूक क्यों नही उपजा सकते.
• जलियावाला बाग हत्याकांड के समय भग़त सिंह की उम्र सिर्फ 12 साल थी। इस घटना ने भगत सिँह को हमेशा के लिए क्रांतिकारी बना दिया.
• भगत सिंह ने अपने काॅलेज के दिनो में ‘National Youth Organisation‘ की स्थापना की थी.
• काॅलेज के दिनो में भग़त सिंह एक अच्छे अभिनेता भी थे. उन्होने बहुत से नाटकों में हिस्सा लिया. भग़त सिंह को कुश्ती का भी शौक था.
• भग़त सिंह एक अच्छे लेखक भी थे वो उर्दू और पंजाबी भाषा में कई अखबारों के लिए नियमित रूप से लिखते थे.
• हिन्दू-मुस्लिम दंगों से दुःखी होकर भग़त सिंह ने घोषणा की थी कि वह नास्तिक हैं.
• भग़त सिंह को फिल्में देखना और रसगुल्ले खाना काफी पसंद था। वे राजगुरु और यशपाल के साथ जब भी मौका मिलता था, फिल्म देखने चले जाते थे। चार्ली चैप्लिन की फिल्में बहुत पसंद थीं।
• ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा भग़त सिंह ने दिया था.
• भगत सिंह की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें गोली मार कर मौत दी जाए। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने उनकी इस इच्छा को भी नज़रअंदाज़ कर दिया.I




यह गाथा है महान क्रांतिकारी देशभक्त सरदार भगत सिंह के शौर्य और पराक्रम की। अपने 23 वर्ष 5 माह और 23 दिन के अल्प कालीन जीवन मे जिस महा-मानव ने देश भक्ति के मायने बदल कर रख दिये और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य कैसे निभाया जाता है, इसकी अद्भुत मिसाल दी। भगत सिंह का जीवन चरित्र लाखो नौजवानों को देश और मातृभूमि के प्रति कर्तव्य पालन की सीख देता रहा है।



कुछ शब्द उन वीर आजादी के दीवानो के नाम जिन्होंने देश के आजादी के लिए अपनी 
प्राणों को देश पर न्यौछावर करदिये :-


 लेकिन किसलिए ये कभी आप सबों ने सोचा नहीं वो अपनी मिट्टी मातृभूमि को माँ मानते     थे और उन्होंने अपने प्राण हँसते हँसते कुर्बान कर दिया ताकि हम आजाद देश में रह सके ,
भगत सिंह ये नहीं जानते थे की वो आजाद भारत को देख पाएंगे या नहीं लेकिन फिर भी वो 
डटे रहे और इतिहास गवाह है की जब तक उनके जिस्म में जान रहा वो संघर्ष करते रहे और अंत में हँसते हँसते मौत को गले लगाया। 
आशा नहीं पूर्ण  विश्वास है आज और आने वाले समय में जब भी देश को आवश्यकता होगी तो एक नहीं सौ सौ भगत सिंह आकर देश पर अपने प्राणो को न्योछावर करेंगे। 
  ------------------जय हिन्द जय भारत ---------------------------

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