तरुणाई का स्वप्न महान
तरुणाई का स्वप्न महान,
हो भारत का पुनरुत्थान।
तरुणाई का स्वप्न महान, हो भारत का पुनरुत्थान।
गूंज उठेगी धरती सारी, होगा जग में गौरवगान।
तरुणाई का स्वप्न महान, हो भारत का पुनरुत्थान।
तरुणाई जब निश्चय करती, भूमंडल आकाश हिले।
कर्म - तपश्या चले निरंतर, हर आंगन में फूल खिले।
कालजयी इस पुण्य धरा पर, करवाएंगे आम्रित पान।।
तरुणाई का स्वप्न महान, हो भारत का पुनरुत्थान।
तरुणाई सामर्थ्य अलौकिक, नया सृजन करती साकार।
विकास के नव - नव रूपों का, गरिमामय हो पूर्ण विचार।
सत्य अहिंसक पावन शैली, जीवन का हर पल गतिमान।।
तरुणाई का स्वप्न महान, हो भारत का पुनरुत्थान।
तरुणाई का दिव्यतेज ही, अंधकार को चीर चले।
निज कौशल्य, विवेक उभारे, सारे संकट विघ्न टरे।
सभी को अवसर, न्याय सभी को, सारी जगती का कल्याण।।
तरुणाई का स्वप्न महान, हो भारत का पुनरुत्थान।
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