Sunday, April 15, 2018

कदम निरन्तर चलते जिनके, श्रम जिनका अविराम है।

कदम निरन्तर चलते जिनके

कदम निरन्तर चलते जिनके, श्रम जिनका अविराम है।
विजय सुनिश्चित होती उनकी, घोषित यह परिणाम् है॥

लौकिक और अलौकिक बन्धन, जिनको बांध नहीं पाते।
घिरें विघ्न बाधाएं फिर भी, तनिक नही वे घबराते।
मान चुनौती करें सामना, यह जीवन संग्राम हैं॥

साहस सम्बल होता जिनका, धैर्य सारथि होता है।
लोकहितैषी बनकर अपने, प्राणों को भी खोता है।
इतिहास सदा लिखता पृष्ठों पर, उनका स्वर्णिम नाम है॥

कालचक्र के माथे पर जो पौरुष की भाषा लिखते।
उनकी मृत्यु कभी नही होती, वे केवल करते दिखते।
मातृभूमि की पावन गीता, गाते आठों याम है॥

3 comments:

  1. भारत माता की जय

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  2. यह गीत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में गाया जाता है l इस गीत को हर क्षण गुनगुनाते रहने से जीवन का लक्ष्य प्राप्त होगा l

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हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह...