Saturday, April 21, 2018

मन मस्त फ़कीरी धारी है अब एक ही धुन जय जय भारत


मन मस्त फ़कीरी धारी है
मन मस्त फ़कीरी धारी है
अब एक ही धुन जय जय भारत ॥
हम धन्य है इस जगजननी की
सेवा का अवसर है पाया
इसकी माटी वायु जल से
दुर्लभ जीवन है विकसाया
यह पुष्प इसी के चरणोमे
माँ प्राणो से भी प्यारी है ॥
सुन्दर सपने नव आकर्षण
सब तोड चले मुख मोड चले
वैभव महलों का क्या करना
सोते सुख से आकाश तले
साधन की ओर ना ताकेंगे
काँटों की राह हमारी है ॥
ऋषियों मुनियों संतो का तप
अनमोल हमारी थाती है
बलदानी वीरो की गाथा
अपने रग रग लहराती है
गौरवमय नव इतीहास रचे
अब अपनी ही तो बारी है ॥

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